हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.150.5

मंडल 10 → सूक्त 150 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 150
अ॒ग्निरत्रिं॑ भ॒रद्वा॑जं॒ गवि॑ष्ठिरं॒ प्राव॑न्नः॒ कण्वं॑ त्र॒सद॑स्युमाह॒वे । अ॒ग्निं वसि॑ष्ठो हवते पु॒रोहि॑तो मृळी॒काय॑ पु॒रोहि॑तः ॥ (५)
अन्ने ने युद्ध में अत्रि, भरद्वाज, गविष्ठिर, कण्व और त्रसदस्यु की रक्षा की है. पुरोहित वसिष्ठ अग्नि को सुख के लिए बुलाते हैं. (५)
Anna has protected Atri, Bharadwaj, Gavisthira, Kanva and Tarshadsu in the war. Priest Vasishtha calls agni for happiness. (5)