हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.156.1

मंडल 10 → सूक्त 156 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 156
अ॒ग्निं हि॑न्वन्तु नो॒ धियः॒ सप्ति॑मा॒शुमि॑वा॒जिषु॑ । तेन॑ जेष्म॒ धनं॑धनम् ॥ (१)
जिस प्रकार युद्धों में घोड़ों को दौड़ाया जाता है, उसी प्रकार हमारी स्तुतियां अग्नि को प्रेरित करें. अग्नि की कृपा से हम सब धनों को जीतें. (१)
Just as horses are run in wars, so so may our praises inspire agni. By the grace of agni, let us conquer all the riches. (1)