हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 157
इ॒मा नु कं॒ भुव॑ना सीषधा॒मेन्द्र॑श्च॒ विश्वे॑ च दे॒वाः ॥ (१)
हम सारे लोकों को शीघ्र ही वश में करें तथा इंद्र एवं सभी देवों द्वारा सुख प्राप्त करें. (१)
May we soon subdue all the people and attain happiness through Indra and all the gods. (1)

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 157
य॒ज्ञं च॑ नस्त॒न्वं॑ च प्र॒जां चा॑दि॒त्यैरिन्द्रः॑ स॒ह ची॑कॢपाति ॥ (२)
इंद्र आदित्यों के साथ मिलकर हमारे यज्ञ, शरीर और प्रजा की रक्षा करें. (२)
Together with the Indra Adityas, protect our yajna, body and subjects. (2)

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 157
आ॒दि॒त्यैरिन्द्रः॒ सग॑णो म॒रुद्भि॑र॒स्माकं॑ भूत्ववि॒ता त॒नूना॑म् ॥ (३)
हे इंद्र! तुम आदित्यों और मरुतों की सहायता लेकर हमारे शरीरों के रक्षक बनो. (३)
O Indra! Be the protector of our bodies by taking the help of adityas and maruts. (3)

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 157
ह॒त्वाय॑ दे॒वा असु॑रा॒न्यदाय॑न्दे॒वा दे॑व॒त्वम॑भि॒रक्ष॑माणाः ॥ (४)
देवगण शत्रुओं को मारकर जब लौटे, तब उनकी अमरता की रक्षा हुई. (४)
When the Devas returned after killing the enemies, their immortality was protected. (4)

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 157
प्र॒त्यञ्च॑म॒र्कम॑नय॒ञ्छची॑भि॒रादित्स्व॒धामि॑षि॒रां पर्य॑पश्यन् ॥ (५)
स्तोताओं ने सेवाओं के साथ स्तुतियों को इंद्र के समीप भेजा. इसके बाद उन्होंने आकाश से होने वाली वर्षा देखी. (५)
The Psalms sent the praises with services to Indra. After that, he saw the rain coming from the sky. (5)