हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.159.3

मंडल 10 → सूक्त 159 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 159
मम॑ पु॒त्राः श॑त्रु॒हणोऽथो॑ मे दुहि॒ता वि॒राट् । उ॒ताहम॑स्मि संज॒या पत्यौ॑ मे॒ श्लोक॑ उत्त॒मः ॥ (३)
मेरे पुत्र शत्रुहंता हैं एवं मेरी पुत्री विशेष रूप से शोभित होती है. मैं सबको विजय करती हूं और मेरे पति के समीप मेरी ही कीर्ति सर्वश्रेष्ठ है. (३)
My son's are enemy destroyers and my daughter is particularly adorned. I conquer everyone and my own fame is the best near to my husband. (3)