ऋग्वेद (मंडल 10)
सम॑जैषमि॒मा अ॒हं स॒पत्नी॑रभि॒भूव॑री । यथा॒हम॒स्य वी॒रस्य॑ वि॒राजा॑नि॒ जन॑स्य च ॥ (६)
मैं अपनी सब सौतों को जीतती हूं. मैं उन्हें पराजित करने वाली हूं, इसी कारण मैं इन वीर इंद्र एवं परिवार के अन्य लोगों पर अधिकार करती हूं. (६)
I win all my dreams. I am about to defeat them, that's why I take control of these brave Indras and others in the family. (6)