हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.163.1

मंडल 10 → सूक्त 163 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 163
अ॒क्षीभ्यां॑ ते॒ नासि॑काभ्यां॒ कर्णा॑भ्यां॒ छुबु॑का॒दधि॑ । यक्ष्मं॑ शीर्ष॒ण्यं॑ म॒स्तिष्का॑ज्जि॒ह्वाया॒ वि वृ॑हामि ते ॥ (१)
हे रोगी! तुम्हारी दोनों आंखों, नाक, कानों, ठोड़ी, शीश, मस्तिष्क एवं जीभ से मैं यक्ष्मा रोग को बाहर निकालता हूं. (१)
Oh patient! With both your eyes, nose, ears, chin, shisha, brain and tongue, I get tuberculosis out. (1)