हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.162.6

मंडल 10 → सूक्त 162 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 162
यस्त्वा॒ स्वप्ने॑न॒ तम॑सा मोहयि॒त्वा नि॒पद्य॑ते । प्र॒जां यस्ते॒ जिघां॑सति॒ तमि॒तो ना॑शयामसि ॥ (६)
हे नारी! जो राक्षसादि स्वप्न या सुषुप्ति की अवस्था में तुम्हें मोहित करके तुम्हारे पास जाता है एवं तुम्हारी संतान को मारना चाहता है, उसे हम यहां से दूर भगाते हैं. (६)
O woman! Whoever fascinates you in the state of demonic dream or sleep and goes to you and wants to kill your child, we drive him away from here. (6)