हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.172.1

मंडल 10 → सूक्त 172 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 172
आ या॑हि॒ वन॑सा स॒ह गावः॑ सचन्त वर्त॒निं यदूध॑भिः ॥ (१)
हे उषा! तुम शोभन तेज के साथ आओ. भरे हुए थनों वाली गाएं मार्ग पर चल रही हैं. (१)
Oh, Usha! You come up with Shobhan Tej. The cows with full trunks are running on the route. (1)