हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.30.8

मंडल 10 → सूक्त 30 → श्लोक 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 30
प्रास्मै॑ हिनोत॒ मधु॑मन्तमू॒र्मिं गर्भो॒ यो वः॑ सिन्धवो॒ मध्व॒ उत्सः॑ । घृ॒तपृ॑ष्ठ॒मीड्य॑मध्व॒रेष्वापो॑ रेवतीः श‍ृणु॒ता हवं॑ मे ॥ (८)
हे बहने वाले जलो! तुम्हारे गर्भ के समान मधुर रस वाला जो झरना है, उसकी मधुर तरंग को इंद्र के लिए भेजो. हे धनयुक्त जलो! मेरी पुकार सुनो. तुम्हारी तरंग यजञों में घृतयुक्त एवं प्रशंसनीय है. (८)
O burn the flowing! Send the sweet wave of the waterfall, which is as sweet as your womb, to Indra. O burn rich! Listen to my call. Your wave is disgusting and admirable in the yajjanas. (8)