ऋग्वेद (मंडल 10)
नी॒चा व॑र्तन्त उ॒परि॑ स्फुरन्त्यह॒स्तासो॒ हस्त॑वन्तं सहन्ते । दि॒व्या अङ्गा॑रा॒ इरि॑णे॒ न्यु॑प्ताः शी॒ताः सन्तो॒ हृद॑यं॒ निर्द॑हन्ति ॥ (९)
पासे कभी नीचे गिरते हैं और कभी ऊपर उछलते हैं. ये बिना हाथ के होकर भी हाथवालों को पराजित करते हैं. ये दिव्य पासे जुआ खेलने के तख्ते पर फेंके जाते समय अंगार बन जाते हैं. ये छूने में ठंडे हैं, पर हारने वाले के मन को जलाते हैं. (९)
Dice sometimes fall down and sometimes bounce up. They defeat the handers even without a hand. These divine dice become embers when thrown on the gambling board. These are cold in touch, but burn the mind of the loser. (9)