हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.49.3

मंडल 10 → सूक्त 49 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 49
अ॒हमत्कं॑ क॒वये॑ शिश्नथं॒ हथै॑र॒हं कुत्स॑मावमा॒भिरू॒तिभिः॑ । अ॒हं शुष्ण॑स्य॒ श्नथि॑ता॒ वध॑र्यमं॒ न यो र॒र आर्यं॒ नाम॒ दस्य॑वे ॥ (३)
मैंने उशना ऋषि को सुखवास देने के लिए अत्क को अनेक आयुधों से मारा. मैंने अनेक रक्षासाधनों से कुत्स की रक्षा की. मैंने शुष्ण असुर को मारने के लिए वज्र उठाया. मैंने दस्युजनों को 'आर्य' नाम से नहीं पुकारा. (३)
I hit Atk with many weapons to give him a happy life for the sage Ushna. I protected the dogs with many defence means. I picked up the thunderbolt to kill the Shushna Asura. I didn't call the bandits 'Arya'. (3)