ऋग्वेद (मंडल 10)
अ॒हं दां॑ गृण॒ते पूर्व्यं॒ वस्व॒हं ब्रह्म॑ कृणवं॒ मह्यं॒ वर्ध॑नम् । अ॒हं भु॑वं॒ यज॑मानस्य चोदि॒ताय॑ज्वनः साक्षि॒ विश्व॑स्मि॒न्भरे॑ ॥ (१)
मैंने अपने स्तोता को अधिक धन दिया. मैंने अपनी वृद्धि करने वाले यज्ञों का अनुष्ठान किया. मैं अपने यजमान को धन देता हूं तथा यज्ञ न करने वाले सभी को युद्ध में पराजित करता हूं. (१)
I gave more money to my stota. I performed the rituals of my growing yagnas. I give money to my host and defeat all those who do not perform yajna in battle. (1)
ऋग्वेद (मंडल 10)
मां धु॒रिन्द्रं॒ नाम॑ दे॒वता॑ दि॒वश्च॒ ग्मश्चा॒पां च॑ ज॒न्तवः॑ । अ॒हं हरी॒ वृष॑णा॒ विव्र॑ता र॒घू अ॒हं वज्रं॒ शव॑से धृ॒ष्ण्वा द॑दे ॥ (२)
स्वर्ग में विचरण करने वाले देवों व धरती तथा जल के जंतुओं ने मेरा नाम “इंद्र रखा है. मैं यज्ञ में जाने के लिए हरे रंग वाले, शक्तिशाली, विविध कर्म वाले एवं शीघ्रगामी अश्वों को रथ में जोड़ता हूं तथा धर्षक वज्र को शक्ति प्राप्त करने के लिए धारण करता हूं. (२)
The gods who wandered in heaven and the animals of the earth and the water have named me "Indra." I add green, powerful, varied deeded and fast-moving horses to the chariot to go to the yagna and wear the dharshaka vajra to gain strength. (2)
ऋग्वेद (मंडल 10)
अ॒हमत्कं॑ क॒वये॑ शिश्नथं॒ हथै॑र॒हं कुत्स॑मावमा॒भिरू॒तिभिः॑ । अ॒हं शुष्ण॑स्य॒ श्नथि॑ता॒ वध॑र्यमं॒ न यो र॒र आर्यं॒ नाम॒ दस्य॑वे ॥ (३)
मैंने उशना ऋषि को सुखवास देने के लिए अत्क को अनेक आयुधों से मारा. मैंने अनेक रक्षासाधनों से कुत्स की रक्षा की. मैंने शुष्ण असुर को मारने के लिए वज्र उठाया. मैंने दस्युजनों को 'आर्य' नाम से नहीं पुकारा. (३)
I hit Atk with many weapons to give him a happy life for the sage Ushna. I protected the dogs with many defence means. I picked up the thunderbolt to kill the Shushna Asura. I didn't call the bandits 'Arya'. (3)
ऋग्वेद (मंडल 10)
अ॒हं पि॒तेव॑ वेत॒सूँर॒भिष्ट॑ये॒ तुग्रं॒ कुत्सा॑य॒ स्मदि॑भं च रन्धयम् । अ॒हं भु॑वं॒ यज॑मानस्य रा॒जनि॒ प्र यद्भरे॒ तुज॑ये॒ न प्रि॒याधृषे॑ ॥ (४)
मैंने अभिलाषा करने वाले कुत्स ऋषि के अधिकार में वेतसु नामक देश इस प्रकार दे दिया था, जिस प्रकार पिता पुत्र को अपनी संपत्ति देता है. मैंने तुग्र और स्वदिभ नामक व्यक्तियों को भी कुत्स के अधिकार में दे दिया. मैं यजमान को राजा बनाता हूं. जिस प्रकार पिता पुत्र को देता है, उसी प्रकार मैं यजमान को प्रिय वस्तुएं देता हूं. (४)
I had given the land called Vetsu to the conqueror of the thirsty Qutsa, in the same way that the Father gives his property to the Son. I also gave people named Tughar and Swadibh under the possession of the Dogs. I make the host king. Just as the Father gives to the Son, so I give beloved things to the Host. (4)
ऋग्वेद (मंडल 10)
अ॒हं र॑न्धयं॒ मृग॑यं श्रु॒तर्व॑णे॒ यन्माजि॑हीत व॒युना॑ च॒नानु॒षक् । अ॒हं वे॒शं न॒म्रमा॒यवे॑ऽकरम॒हं सव्या॑य॒ पड्गृ॑भिमरन्धयम् ॥ (५)
जब श्रुतर्वा ऋषि मेरे समीप आए और उन्होंने मेरी स्तुति की, तब मैंने उनके कल्याण के लिए रांथय नामक असुर को वश में किया. मैंने वेश असुर को नम्र ऋषि तथा षड्गृभि असुर को सव्य ऋषि के कल्याण के लिए वश में किया. (५)
When sage Shruterva came near to me and praised me, I subdued the asura named Ranthaya for his welfare. I subdued the disguise asura as a humble sage and the shadgribhi asura for the welfare of the sage Savya. (5)
ऋग्वेद (मंडल 10)
अ॒हं स यो नव॑वास्त्वं बृ॒हद्र॑थं॒ सं वृ॒त्रेव॒ दासं॑ वृत्र॒हारु॑जम् । यद्व॒र्धय॑न्तं प्र॒थय॑न्तमानु॒षग्दू॒रे पा॒रे रज॑सो रोच॒नाक॑रम् ॥ (६)
मैं वह इंद्र हूं, जिसने नववास्त्व और बृहद्रथ को वृत्र के समान मारा था. मैंने बढ़ते हुए एवं प्रसिद्ध दोनों असुरों को उज्ज्वल लोक से बाहर निकाल दिया था. (६)
I am the Indra who hit Navavasattva and Brihadratha like Vritra. I had driven out both the growing and famous asuras from the bright realm. (6)
ऋग्वेद (मंडल 10)
अ॒हं सूर्य॑स्य॒ परि॑ याम्या॒शुभिः॒ प्रैत॒शेभि॒र्वह॑मान॒ ओज॑सा । यन्मा॑ सा॒वो मनु॑ष॒ आह॑ नि॒र्णिज॒ ऋध॑क्कृषे॒ दासं॒ कृत्व्यं॒ हथैः॑ ॥ (७)
मैं शीघ्रगामी एवं उज्ज्वल वर्ण अश्वों द्वारा ढोया जाकर अपने बल से सूर्य की परिक्रमा करता हूं. जब यजमान का सोम अभिषव मुझे बुलाता है, उस समय मैं हनन साधन आयुधों द्वारा शत्रु को ढेर करता हूं. (७)
I orbit the sun with my own force by being carried by the fast-moving and bright colour horses. When the host's Mon abhishava calls me, at that time I pile up the enemy by the means of violation. (7)
ऋग्वेद (मंडल 10)
अ॒हं स॑प्त॒हा नहु॑षो॒ नहु॑ष्टरः॒ प्राश्रा॑वयं॒ शव॑सा तु॒र्वशं॒ यदु॑म् । अ॒हं न्य१॒॑न्यं सह॑सा॒ सह॑स्करं॒ नव॒ व्राध॑तो नव॒तिं च॑ वक्षयम् ॥ (८)
मैं सात शत्रु नगरियों को नष्ट करने वाला व बंधनकर्त्ताओं में श्रेष्ठ हूं. मैंने अपने बल से बुर्वश और यदु को प्रसिद्ध किया. मैंने अपने अन्य स्तोताओं को शक्तिशाली बनाया तथा शत्रुओं की उन्नतिशील निन्यानवे नगरियों को ध्वस्त किया. (८)
I am the destroyer of seven enemy cities and best of shackler. I made Burvash and Yadu famous with my own strength. I made my other stotas powerful and demolished the ninety-nine progressive cities of the enemies. (8)