ऋग्वेद (मंडल 10)
अ॒हं सूर्य॑स्य॒ परि॑ याम्या॒शुभिः॒ प्रैत॒शेभि॒र्वह॑मान॒ ओज॑सा । यन्मा॑ सा॒वो मनु॑ष॒ आह॑ नि॒र्णिज॒ ऋध॑क्कृषे॒ दासं॒ कृत्व्यं॒ हथैः॑ ॥ (७)
मैं शीघ्रगामी एवं उज्ज्वल वर्ण अश्वों द्वारा ढोया जाकर अपने बल से सूर्य की परिक्रमा करता हूं. जब यजमान का सोम अभिषव मुझे बुलाता है, उस समय मैं हनन साधन आयुधों द्वारा शत्रु को ढेर करता हूं. (७)
I orbit the sun with my own force by being carried by the fast-moving and bright colour horses. When the host's Mon abhishava calls me, at that time I pile up the enemy by the means of violation. (7)