ऋग्वेद (मंडल 10)
कु॒र्मस्त॒ आयु॑र॒जरं॒ यद॑ग्ने॒ यथा॑ यु॒क्तो जा॑तवेदो॒ न रिष्याः॑ । अथा॑ वहासि सुमन॒स्यमा॑नो भा॒गं दे॒वेभ्यो॑ ह॒विषः॑ सुजात ॥ (७)
देवों ने कहा-“हे अग्नि! हम तुम्हें जरारहित आयु प्रदान करते हैं. हे जातवेद! इस आयु से युक्त होकर तुम नहीं मरोगे. हे शोभन जन्म वाले अग्नि! तुम प्रसन्नचित्त होकर यजमान द्वारा दिए गए हव्य का भाग देवों के पास ले जाओ.” (७)
The gods said, "O agni! We give you a lifeless age. O Jathaveda! You won't die of this age. O agni of glory born! Be glad to take the portion of the promise given by the host to the gods." (7)