ऋग्वेद (मंडल 10)
द्विधा॑ सू॒नवोऽसु॑रं स्व॒र्विद॒मास्था॑पयन्त तृ॒तीये॑न॒ कर्म॑णा । स्वां प्र॒जां पि॒तरः॒ पित्र्यं॒ सह॒ आव॑रेष्वदधु॒स्तन्तु॒मात॑तम् ॥ (६)
आदित्य के पुत्र देवों ने प्रजा उत्पत्तिरूप तीसरे कर्म द्वारा शक्तिशाली एवं स्वर्गज्ञाता आदित्य को दो प्रकार से स्थापित किया था. हमारे पितरों ने अपनी संतान को उत्पन्न करके उनके शरीर में पैतृक बल स्थापित किया. उन्होंने चिरस्थायी वंश स्थापित किया. (६)
Aditya's son Devas had established the powerful and heavenly Aditya in two ways by the third karma of praja genesis. Our fathers created their offspring and established the parental force in their bodies. He established a lasting dynasty. (6)