हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.60.2

मंडल 10 → सूक्त 60 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 60
अस॑मातिं नि॒तोश॑नं त्वे॒षं नि॑य॒यिनं॒ रथ॑म् । भ॒जेर॑थस्य॒ सत्प॑तिम् ॥ (२)
हम शत्रुहंता, तेजस्वी, रथ के समान सबकी अभिलाषा पूर्ण करने वाले, भजेरथ को पराजित करने वाले एवं सज्जनपालक राजा असमाति के देश में गए. (२)
We went to the land of flamboyant king Asamati, enemy destroyer, fullfilling everyone's wishes like a chariot, the defeater of Bhajertha. (2)