ऋग्वेद (मंडल 10)
न तम॑श्नोति॒ कश्च॒न दि॒व इ॑व॒ सान्वा॒रभ॑म् । सा॒व॒र्ण्यस्य॒ दक्षि॑णा॒ वि सिन्धु॑रिव पप्रथे ॥ (९)
मनु जब दानकर्म आरंभ करते हैं तो कोई भी उनकी समानता नहीं करता. वे सोने के पर्वत के समान स्थित हैं. सावर्णि मनु की दक्षिणा नदी के समान सब जगह बढ़ती है. (९)
When Manu begins charity, no one equals him. They are located similar to the Mountain of Gold. Savarna grows everywhere like the Dakshina river of Manu. (9)