ऋग्वेद (मंडल 10)
नरा॑ वा॒ शंसं॑ पू॒षण॒मगो॑ह्यम॒ग्निं दे॒वेद्ध॑म॒भ्य॑र्चसे गि॒रा । सूर्या॒मासा॑ च॒न्द्रम॑सा य॒मं दि॒वि त्रि॒तं वात॑मु॒षस॑म॒क्तुम॒श्विना॑ ॥ (३)
हे मेरे मन! मानवों द्वारा प्रशंसनीय, धनदान के द्वारा स्तोताओं का पोषण करने वाले एवं अन्यों द्वारा अगम्य पूषा देव एवं देवों द्वारा प्रज्वलित अग्नि देव की स्तुतियों द्वारा पूजा करो. तुम सूर्य, चंद्र, यम, द्युलोक में स्थित यम, तीनों लोकों में व्याप्त इंद्र, वायु, उषा, रात्रि तथा अश्चिनीकुमारों की स्तुति करो. (३)
Oh my mind! Worship the praiseworthy by human beings, the nurturer of the psalms by the gifting, and the praises of the agni god ignited by the gods, the inaccessible Pusha God by others. Praise the Sun, Chandra, Yama, Yama in Dulok, Indra, Vayu, Usha, Ratri and Aschinikumaras in the three lokas. (3)