हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.68.1

मंडल 10 → सूक्त 68 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 68
उ॒द॒प्रुतो॒ न वयो॒ रक्ष॑माणा॒ वाव॑दतो अ॒भ्रिय॑स्येव॒ घोषाः॑ । गि॒रि॒भ्रजो॒ नोर्मयो॒ मद॑न्तो॒ बृह॒स्पति॑म॒भ्य१॒॑र्का अ॑नावन् ॥ (१)
खेतों को जल से सींचने वाले किसान पकी फसलों को रखाते समय जैसा शब्द करते हैं अथवा बादल जिस प्रकार गर्जन करते हैं अथवा बादलों से गिरा हुआ जल समूह जिस प्रकार नाद करता है, उसी प्रकार स्तोताओं ने बृहस्पति की स्तुति की. (१)
The psalms praised Jupiter in the same way that the peasants who irrigate the fields with water, the words do when they keep ripe crops, or the way the clouds roar or the group of water dropped from the clouds makes a sound. (1)