हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.68.2

मंडल 10 → सूक्त 68 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 68
सं गोभि॑राङ्गिर॒सो नक्ष॑माणो॒ भग॑ इ॒वेद॑र्य॒मणं॑ निनाय । जने॑ मि॒त्रो न दम्प॑ती अनक्ति॒ बृह॑स्पते वा॒जया॒शूँरि॑वा॒जौ ॥ (२)
अंगिरा ऋषि के पुत्र एवं भगदेव के समान अपने तेज से सबको व्याप्त करते हुए बृहस्पति गुफा में बंद गायों तक सूर्य का प्रकाश ले गए. सूर्य जिस प्रकार जनपद में अपनी किरणों का संयोग करता है एवं पतिपत्नी को परस्पर मिलाता है, उसी प्रकार बृहस्पति ने गायों को उनके स्वामियों से मिलाया. हे बृहस्पति! गायों को युद्ध में दौड़ने वाले घोड़ों के समान दौड़ाओ. (२)
The son of Sage Angira and like The Lord, permeating everyone with his brightness, Jupiter took the light of the sun to the cows locked in the cave. Just as the sun combines its rays in the district and mixes the husband and wife, so jupiter mixed the cows with their owners. O Jupiter! Run the cows like the horses that run in battle. (2)