हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.74.5

मंडल 10 → सूक्त 74 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 74
शची॑व॒ इन्द्र॒मव॑से कृणुध्व॒मना॑नतं द॒मय॑न्तं पृत॒न्यून् । ऋ॒भु॒क्षणं॑ म॒घवा॑नं सुवृ॒क्तिं भर्ता॒ यो वज्रं॒ नर्यं॑ पुरु॒क्षुः ॥ (५)
हे यज्ञकर्म करने वाले यजमानो! कभी न झुकने वाले, शत्रुओं को वश में करने वाले, महान्‌, धनसंपन्न, शोभन स्तुतियुक्त, प्रसिद्ध एवं मानवहितकारी वञ्ज धारण करने वाले इंद्र की शरण में रक्षा पाने के लिए जाओ. (५)
O hosts who perform yajnakarma! Go to the refuge of Indra, who never bows down, subdues enemies, is great, wealthy, well-to-do, admired, famous and possessed of man-friendly vanja. (5)