ऋग्वेद (मंडल 10)
दि॒वि स्व॒नो य॑तते॒ भूम्यो॒पर्य॑न॒न्तं शुष्म॒मुदि॑यर्ति भा॒नुना॑ । अ॒भ्रादि॑व॒ प्र स्त॑नयन्ति वृ॒ष्टयः॒ सिन्धु॒र्यदेति॑ वृष॒भो न रोरु॑वत् ॥ (३)
सिंधु नदी के बहने का शब्द धरती से उठकर आकाश को व्याप्त कर लेता है. सिंधु महान् वेग और ज्योतिपूर्ण लहरों के साथ बहती है. सिंधु नदी जिस समय बैल के समान गरजती हुई बहती है, उस समय ऐसा जान पड़ता है, जैसे आकाश से वर्षा हो रही हो. (३)
The word of the flowing of the Indus river rises from the earth and covers the sky. The Indus flows with great velocity and luminous waves. At the time when the Indus river flows like a bull, it looks as if it is raining from the sky. (3)