हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.85.20

मंडल 10 → सूक्त 85 → श्लोक 20 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 85
सु॒किं॒शु॒कं श॑ल्म॒लिं वि॒श्वरू॑पं॒ हिर॑ण्यवर्णं सु॒वृतं॑ सुच॒क्रम् । आ रो॑ह सूर्ये अ॒मृत॑स्य लो॒कं स्यो॒नं पत्ये॑ वह॒तुं कृ॑णुष्व ॥ (२०)
हे सूर्या! तुम शोभन पलाश एवं शाल्मली वृक्षों द्वारा निर्मित नाना रूप वाले सुनहरे आभूषणों से युक्त संगठित एवं सुंदर पहियों वाले रथ पर चढ़ो. तुम अपने पति से सुखकर एवं अमृत स्थान पर प्राप्त होओ. (२०)
Oh, O Surya! You climb a chariot with organized and beautiful wheels with various golden ornaments made by shobhan palash and shalmali trees. You get happiness and nectar from your husband in a place. (20)