ऋग्वेद (मंडल 10)
उदी॒र्ष्वातः॒ पति॑वती॒ ह्ये॒३॒॑षा वि॒श्वाव॑सुं॒ नम॑सा गी॒र्भिरी॑ळे । अ॒न्यामि॑च्छ पितृ॒षदं॒ व्य॑क्तां॒ स ते॑ भा॒गो ज॒नुषा॒ तस्य॑ विद्धि ॥ (२१)
हे विश्वावसु! कन्या के पास से उठो, क्योंकि यह कन्या पति वाली हो चुकी है. मैं नमस्कार और स्तुतियों द्वारा तुम्हारी स्तुति करता हूं. पिता के घर में विवाह योग्य दूसरी कन्या हो तो उसकी इच्छा करो. यह समझ लो कि तुम्हारे भाग के रूप में वही उत्पन्न हुई है. (२१)
O Vishwavasu! Get away from the kanya (girl), because this kanya has now a husband. I praise you with greetings and praises. If there is a marriageable second girl in the father's house, then think about her. Understand that the other girl has arisen as part of your destiny. (21)