हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.87.4

मंडल 10 → सूक्त 87 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 87
य॒ज्ञैरिषूः॑ सं॒नम॑मानो अग्ने वा॒चा श॒ल्याँ अ॒शनि॑भिर्दिहा॒नः । ताभि॑र्विध्य॒ हृद॑ये यातु॒धाना॑न्प्रती॒चो बा॒हून्प्रति॑ भङ्ध्येषाम् ॥ (४)
हे अग्नि! तुम हमारे यज्ञों और स्तुतियों के द्वारा बाणों को झुकाते हुए एवं उनके फलों को वञ्रों के द्वारा तेज करते हुए उन बाणं से राक्षसों के हृदयों को बेधो तथा उनकी भुजाओं को तोड़ दो. (४)
O agni! You pierce the hearts of the demons with those arrows and break their arms with those arrows, bowing down arrows through our sacrifices and praises and sharpening their fruits with vanas. (4)