ऋग्वेद (मंडल 10)
सु॒दे॒वो अ॒द्य प्र॒पते॒दना॑वृत्परा॒वतं॑ पर॒मां गन्त॒वा उ॑ । अधा॒ शयी॑त॒ निरृ॑तेरु॒पस्थेऽधै॑नं॒ वृका॑ रभ॒सासो॑ अ॒द्युः ॥ (१४)
पुरूरवा ने कहा-“तुम्हारे साथ क्रीड़ा करने वाला तुम्हारा प्रेमी मैं आज ही गिर पडूंगा. फिर कभी नहीं उठूंगा. मैं बहुत दूर चला जाऊंगा. मैं उस दुर्दशा में ही मर जाऊंगा एवं वेगशील भेड़िए मुझे खा जाएंगे.” (१४)
Pururva said, "I will fall today, your lover who played with you. I'll never get up again. I'll go too far. I will die in that plight and the fast wolves will eat me up." (14)