ऋग्वेद (मंडल 10)
श॒तं वो॑ अम्ब॒ धामा॑नि स॒हस्र॑मु॒त वो॒ रुहः॑ । अधा॑ शतक्रत्वो यू॒यमि॒मं मे॑ अग॒दं कृ॑त ॥ (२)
हे माता के समान ओषधियो! तुम्हारे जन्म सौ एवं तुम्हारे प्ररोहण हजार हैं. हे सौ कर्मो वाली ओषधियो! तुम मुझे निरोग करो. (२)
O mother-like drugs! Your births are hundred and your ascents are thousand. O a hundred-doers! You make me healthy. (2)