हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 2.34.14

मंडल 2 → सूक्त 34 → श्लोक 14 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 2)

ऋग्वेद: | सूक्त: 34
ताँ इ॑या॒नो महि॒ वरू॑थमू॒तय॒ उप॒ घेदे॒ना नम॑सा गृणीमसि । त्रि॒तो न यान्पञ्च॒ होतॄ॑न॒भिष्ट॑य आव॒वर्त॒दव॑राञ्च॒क्रियाव॑से ॥ (१४)
हम वरुणों से विस्तृत धन की याचना करते हुए अपनी रक्षा के निमित्त स्तोत्रों द्वारा प्रार्थना करते हैं. त्रित ऋषि ने अपनी इच्छापूर्ति के लिए नाभिचक्र द्वारा प्राण, अपान, समान, व्यान ओर उदान पांच होताओं को लौटा लिया. (१४)
We pray through hymns to protect ourselves by asking for vast wealth from varunas. Sage Trinity returned the five hotas of prana, apan, sama, vyan and uddan through the navel chakra to fulfill his wish. (14)