हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 2.41.10

मंडल 2 → सूक्त 41 → श्लोक 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 2)

ऋग्वेद: | सूक्त: 41
इन्द्रो॑ अ॒ङ्ग म॒हद्भ॒यम॒भी षदप॑ चुच्यवत् । स हि स्थि॒रो विच॑र्षणिः ॥ (१०)
इंद्र पराभवकारी महान्‌ भय दूर करते हैं, इसलिए वे अचंचल एवं विक्वदरष्टा हैं. (१०)
Indra defeaters remove great fears, so they are achakchal and vikvadarastha. (10)