ऋग्वेद (मंडल 2)
इन्द्रो॑ अ॒ङ्ग म॒हद्भ॒यम॒भी षदप॑ चुच्यवत् । स हि स्थि॒रो विच॑र्षणिः ॥ (१०)
इंद्र पराभवकारी महान् भय दूर करते हैं, इसलिए वे अचंचल एवं विक्वदरष्टा हैं. (१०)
Indra defeaters remove great fears, so they are achakchal and vikvadarastha. (10)