हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 2.41.15

मंडल 2 → सूक्त 41 → श्लोक 15 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 2)

ऋग्वेद: | सूक्त: 41
इन्द्र॑ज्येष्ठा॒ मरु॑द्गणा॒ देवा॑सः॒ पूष॑रातयः । विश्वे॒ मम॑ श्रुता॒ हव॑म् ॥ (१५)
मरुद्गण हमारी पुकार सुनें. उन में इंद्र सबसे बड़े हैं और पूषा उन्हें दान देते हैं. (१५)
The deserts hear our call. Indra is the eldest of them and Pusha donates to them. (15)