ऋग्वेद (मंडल 3)
इळा॑मग्ने पुरु॒दंसं॑ स॒निं गोः श॑श्वत्त॒मं हव॑मानाय साध । स्यान्नः॑ सू॒नुस्तन॑यो वि॒जावाग्ने॒ सा ते॑ सुम॒तिर्भू॑त्व॒स्मे ॥ (२३)
हे अग्नि! मुझ होता को मेरे कर्मो के अनुकूल गाय प्रदान करने वाली स्थायी भूमि दो. मेरा पुत्र संतान का विस्तार करने वाला हो. मेरे प्रति तुम्हारी उत्तम बुद्धि हो. (२३)
O agni! Give me permanent land to provide a cow suited to my deeds. My son is going to expand the offspring. Have your best wisdom towards me. (23)