हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 3.26.5

मंडल 3 → सूक्त 26 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 3)

ऋग्वेद: | सूक्त: 26
अ॒ग्नि॒श्रियो॑ म॒रुतो॑ वि॒श्वकृ॑ष्टय॒ आ त्वे॒षमु॒ग्रमव॑ ईमहे व॒यम् । ते स्वा॒निनो॑ रु॒द्रिया॑ व॒र्षनि॑र्णिजः सिं॒हा न हे॒षक्र॑तवः सु॒दान॑वः ॥ (५)
अग्नि के आश्रित एवं वृक्षों को आकर्षित करने वाले मरुतों का उज्ज्वल एवं सशक्त आश्रय पाने के लिए हम याचना करते हैं. वे रुद्रपुत्र मरुद्गण वर्षा का रूप धारण करने वाले, हिनहिनाते हुए, सिंह के समान गर्जनकारी तथा शोभन जल देने वाले हैं. (५)
We beseech for a bright and strong shelter for the agni dependents and the maruts that attract the trees. He is the rudraputra marudgana who takes the form of rain, achhinating, roaring like a lion and giving water. (5)