हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 3.26.6

मंडल 3 → सूक्त 26 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 3)

ऋग्वेद: | सूक्त: 26
व्रातं॑व्रातं ग॒णंग॑णं सुश॒स्तिभि॑र॒ग्नेर्भामं॑ म॒रुता॒मोज॑ ईमहे । पृष॑दश्वासो अनव॒भ्ररा॑धसो॒ गन्ता॑रो य॒ज्ञं वि॒दथे॑षु॒ धीराः॑ ॥ (६)
हम बहुत से स्तुति मंत्रों द्वारा अग्नि के तेज और मरुतों के ओज की याचना करते हैं. बुंदकियों से युक्त घोड़ों वाले, संपूर्ण धनयुक्त एवं धीर मरुद्गण यज्ञ में हवि को लक्ष्य करके जाते हैं. (६)
We pray for the glory of agni and the oz of the maruts through many praise mantras. Horses with bundkis, with full wealth and patience, go to the yagna targeting Havi. (6)