हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 3.29.1

मंडल 3 → सूक्त 29 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 3)

ऋग्वेद: | सूक्त: 29
अस्ती॒दम॑धि॒मन्थ॑न॒मस्ति॑ प्र॒जन॑नं कृ॒तम् । ए॒तां वि॒श्पत्नी॒मा भ॑रा॒ग्निं म॑न्थाम पू॒र्वथा॑ ॥ (१)
यह अग्नि-मंथन का साधन तथा उसे उत्पन्न करने वाला पदार्थ है. इस विश्वपालिका अरणि को लाओ. हम पहले की तरह ही अग्नि का मंथन करेंगे. (१)
It is the instrument of agni-churning and the substance that produces it. Bring this world-cranial arani. We will churn out the agni just like before. (1)