हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 3.31.19

मंडल 3 → सूक्त 31 → श्लोक 19 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 3)

ऋग्वेद: | सूक्त: 31
तम॑ङ्गिर॒स्वन्नम॑सा सप॒र्यन्नव्यं॑ कृणोमि॒ सन्य॑से पुरा॒जाम् । द्रुहो॒ वि या॑हि बहु॒ला अदे॑वीः॒ स्व॑श्च नो मघवन्सा॒तये॑ धाः ॥ (१९)
हे इंद्र! मैं अंगिरागोत्रीय ऋषियों के समान तुझ पुरातन की पूजा करता हुआ स्तुतियों दवारा तुम्हें नवीन बनाता हूं. तुम देवविरोधी बहुत से शत्रु राक्षसों को मार डालो. हे मघवन्‌! हमें उपभोग के लिए धन दो. (१९)
O Indra! I make you new as the Angiragothrists, worshiping you as the ancient ones, and praise you. You kill many enemy monsters against god. Oh, it's a maghwan! Give us money for consumption. (19)