हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 3.33.8

मंडल 3 → सूक्त 33 → श्लोक 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 3)

ऋग्वेद: | सूक्त: 33
ए॒तद्वचो॑ जरित॒र्मापि॑ मृष्ठा॒ आ यत्ते॒ घोषा॒नुत्त॑रा यु॒गानि॑ । उ॒क्थेषु॑ कारो॒ प्रति॑ नो जुषस्व॒ मा नो॒ नि कः॑ पुरुष॒त्रा नम॑स्ते ॥ (८)
“हे स्तोता! हमारा तुम्हारा जो संवाद हुआ है, इसे मत भूलना. भविष्य में होने वाले यज्ञों में स्तुति रचना करके तुम हमारी सेवा करो. हमें पुरुष के समान प्रगल्भ मत बनाओ. हम तुम्हें नमस्कार करती हैं.” (८)
"This stota! Don't forget the conversation we have had with you. May you serve us by creating praise in future yagnas. Don't make us as ugly as men. We greet you." (8)