हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 3.33.9

मंडल 3 → सूक्त 33 → श्लोक 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 3)

ऋग्वेद: | सूक्त: 33
ओ षु स्व॑सारः का॒रवे॑ श‍ृणोत य॒यौ वो॑ दू॒रादन॑सा॒ रथे॑न । नि षू न॑मध्वं॒ भव॑ता सुपा॒रा अ॑धोअ॒क्षाः सि॑न्धवः स्रो॒त्याभिः॑ ॥ (९)
विश्वामित्र ने उत्तर दिया-“हे बहिन के समान नदियो! मुझ स्तुतिकर्ता के वचनों को सुनो. मैं बैलगाड़ी और रथ की सहायता से दूर देश से तुम्हारे पास आया हूं. तुम नीची एवं सरलता से पार करने योग्य बन जाओ. हे नदियो! तुम मेरे रथ के पहिए के निचले भाग को छूती हुई बहो.” (९)
Vishwamitra replied, "O rivers like a sister! Listen to the words of my praiseor. I have come to you from a distant land with the help of bullock carts and chariots. You become lowly and easily transgressable. O rivers! You are touching the bottom of the wheel of my chariot." (9)