हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 3.37.6

मंडल 3 → सूक्त 37 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 3)

ऋग्वेद: | सूक्त: 37
वाजे॑षु सास॒हिर्भ॑व॒ त्वामी॑महे शतक्रतो । इन्द्र॑ वृ॒त्राय॒ हन्त॑वे ॥ (६)
हे शतक्रतु इंद्र! तुम युद्ध में शत्रुओं को हराओ. हम वृत्र का नाश करने के लिए तुम्हें बुलाते हैं. (६)
O Sahartu Indra! You defeat the enemies in battle. We call you to destroy the circle. (6)