ऋग्वेद (मंडल 3)
द्यु॒म्नेषु॑ पृत॒नाज्ये॑ पृत्सु॒तूर्षु॒ श्रव॑स्सु च । इन्द्र॒ साक्ष्वा॒भिमा॑तिषु ॥ (७)
हे इंद्र! धन, युद्ध, वीरों एवं बल का अभिमान करने वाले हमारे शत्रुओं को हराओ. (७)
O Indra! Defeat our enemies who boast of wealth, war, heroes and strength. (7)