हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 3.53.20

मंडल 3 → सूक्त 53 → श्लोक 20 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 3)

ऋग्वेद: | सूक्त: 53
अ॒यम॒स्मान्वन॒स्पति॒र्मा च॒ हा मा च॑ रीरिषत् । स्व॒स्त्या गृ॒हेभ्य॒ आव॒सा आ वि॒मोच॑नात् ॥ (२०)
वनस्पतियों से बना हुआ यह रथ हमें न छोड़े और न विनष्ट करे. हम लोग जब तक घर न पहुंचें, जब तक हमारा रथ चले और जब तक हम रथ से घोड़े अलग न कर दें, तब तक हमारा कल्याण हो. (२०)
Let this chariot made of vegetation not leave us or destroy us. We may have welfare until we reach home, until our chariot runs and until we separate the horses from the chariot. (20)