ऋग्वेद (मंडल 3)
अ॒भि यो म॑हि॒ना दिवं॑ मि॒त्रो ब॒भूव॑ स॒प्रथाः॑ । अ॒भि श्रवो॑भिः पृथि॒वीम् ॥ (७)
जिस मित्र ने अपनी महिमा से अंतरिक्ष को हरा दिया है, उसी कीर्तिशाली ने धरती को अन्न से भली प्रकार पूर्ण किया है. (७)
The friend who has defeated the space with his glory, the same rich man has made the earth well full with food. (7)