हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 3.60.1

मंडल 3 → सूक्त 60 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 3)

ऋग्वेद: | सूक्त: 60
इ॒हेह॑ वो॒ मन॑सा ब॒न्धुता॑ नर उ॒शिजो॑ जग्मुर॒भि तानि॒ वेद॑सा । याभि॑र्मा॒याभिः॒ प्रति॑जूतिवर्पसः॒ सौध॑न्वना य॒ज्ञियं॑ भा॒गमा॑न॒श ॥ (१)
हे ऋभुओ! तुम्हारे कर्मो को सब लोग मन से जानते हैं. हे नेताओ एवं सुधन्वा के पुत्रो! बुम अपने ज्ञान से उन कर्मो को जान लेते हो, जिन कर्मो द्वारा तुम शत्रु को हराने वाला तेज पाने के लिए यज्ञ के भाग की अभिलाषा करते हो. (१)
Hey, Lord! Everyone knows your deeds by heart. O sons of leaders and sudhanva! Bum knows with your knowledge the deeds by which you desire the part of the yagna to get the speed of defeating the enemy. (1)