हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 3.61.2

मंडल 3 → सूक्त 61 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 3)

ऋग्वेद: | सूक्त: 61
उषो॑ दे॒व्यम॑र्त्या॒ वि भा॑हि च॒न्द्रर॑था सू॒नृता॑ ई॒रय॑न्ती । आ त्वा॑ वहन्तु सु॒यमा॑सो॒ अश्वा॒ हिर॑ण्यवर्णां पृथु॒पाज॑सो॒ ये ॥ (२)
हे मरणरहित, सोने के रथ वाली, प्रिय एवं सत्य वाणी बोलती हुई उषा! तुम सूर्यकिरणों से प्रकाशित बनो. महान्‌ बलशाली, लाल रंग वाले एवं रथ में सरलता से जोड़ने योग्य घोड़े तुझ सुनहरे रंग वाली को बुलावें. (२)
O deathless, with a golden chariot, dear and speaking the truth, Usha! You become illuminated by the sunshines. Call you a golden horse, a horse that is strong, red and easily connected to the chariot. (2)