हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 4.26.2

मंडल 4 → सूक्त 26 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 4)

ऋग्वेद: | सूक्त: 26
अ॒हं भूमि॑मददा॒मार्या॑या॒हं वृ॒ष्टिं दा॒शुषे॒ मर्त्या॑य । अ॒हम॒पो अ॑नयं वावशा॒ना मम॑ दे॒वासो॒ अनु॒ केत॑मायन् ॥ (२)
मैंने आर्य मनु के लिए धरती दी थी. हव्य देने वाले लोगों को वर्षारूपी जल मैं ही देता हूं. मैं कलकल शब्द करते हुए जल को सभी स्थानों पर लाया था. देवगण मेरे ही संकल्प का अनुगमन करते हैं. (२)
I gave the earth for Arya Manu. I give rain water to the people who give the greetings. I had brought water to all the places while doing the word kalkal. The gods follow my own resolve. (2)