ऋग्वेद (मंडल 4)
गर्भे॒ नु सन्नन्वे॑षामवेदम॒हं दे॒वानां॒ जनि॑मानि॒ विश्वा॑ । श॒तं मा॒ पुर॒ आय॑सीररक्ष॒न्नध॑ श्ये॒नो ज॒वसा॒ निर॑दीयम् ॥ (१)
मैंने गर्भ में रहते हुए ही इंद्रादि देवों के सभी जन्मों को जाना था. इससे पहले सैकड़ों लौह शरीरों ने हमारी रक्षा की थी एवं हमें श्येन पक्षी के समान आत्मा के रूप में शरीर से निकाला था. (१)
I had known all the births of the Indradi Devas while I was in the womb. Earlier, hundreds of iron bodies had protected us and exhumed us from the body as a soul like a lion bird. (1)
ऋग्वेद (मंडल 4)
न घा॒ स मामप॒ जोषं॑ जभारा॒भीमा॑स॒ त्वक्ष॑सा वी॒र्ये॑ण । ई॒र्मा पुरं॑धिरजहा॒दरा॑तीरु॒त वाता॑ँ अतर॒च्छूशु॑वानः ॥ (२)
वह गर्भ पूर्णरूप से मेरे ज्ञान का अपहरण नहीं कर सका. मैंने गर्भ स्थित दुःख को ज्ञानरूपी तीक्ष्ण बल द्वारा हराया. सबके प्रेरक परमात्मा ने गर्भ स्थित शत्रुओं का नाश किया. उसने पूर्ण रूप धारण करके कष्ट पहुंचाने वाले वायुओं को दूर किया. (२)
That womb could not completely hijack my knowledge. I defeated the sorrow of the womb by the sharp force of wisdom. The inspiring God of all destroyed the enemies of the womb. He took full form and removed the painful winds. (2)
ऋग्वेद (मंडल 4)
अव॒ यच्छ्ये॒नो अस्व॑नी॒दध॒ द्योर्वि यद्यदि॒ वात॑ ऊ॒हुः पुरं॑धिम् । सृ॒जद्यद॑स्मा॒ अव॑ ह क्षि॒पज्ज्यां कृ॒शानु॒रस्ता॒ मन॑सा भुर॒ण्यन् ॥ (३)
सोम लाते समय श्येन पक्षी ने स्वर्ग से नीचे की ओर मुंह करके शब्द किया. सोम के रखवालों ने उससे सोम छीन लिया. बाण छोड़ने वाले कृशानु नामक सोमरक्षक ने धनुष पर डोरी चढ़ाई, तब श्येन पक्षी मन के समान तीव्र गति से सोम ले आया. (३)
While bringing the mon, the sheen bird spoke from heaven facing downwards. Som's keepers snatched som from him. The somashak named Krishnanu, who dropped the arrow, climbed the string on the bow, then the sheen bird brought the som at a fast speed like the mind. (3)
ऋग्वेद (मंडल 4)
ऋ॒जि॒प्य ई॒मिन्द्रा॑वतो॒ न भु॒ज्युं श्ये॒नो ज॑भार बृह॒तो अधि॒ ष्णोः । अ॒न्तः प॑तत्पत॒त्र्य॑स्य प॒र्णमध॒ याम॑नि॒ प्रसि॑तस्य॒ तद्वेः ॥ (४)
अश्विनीकुमार जिस प्रकार शक्तिशाली रक्षकों वाले स्थान से भुज्यु नामक राजा को उठाकर ले गए थे, उसी प्रकार इंद्र द्वारा रक्षित महान् स्वर्गलोक से सीधा चलने वाला श्येन पक्षी सोम ले आया था. उस समय युद्ध में कृशानु के बाणों से घायल पक्षी का एक पंख गिर गया था. (४)
Just as Ashwinikumar had picked up a king named Bhujyu from a place of powerful guards, so did the soman bird Som, a straight-moving shien bird from the great paradise protected by Indra. At that time, a wing of the bird injured by the arrows of Krishnanu had fallen in the war. (4)
ऋग्वेद (मंडल 4)
अध॑ श्वे॒तं क॒लशं॒ गोभि॑र॒क्तमा॑पिप्या॒नं म॒घवा॑ शु॒क्रमन्धः॑ । अ॒ध्व॒र्युभिः॒ प्रय॑तं॒ मध्वो॒ अग्र॒मिन्द्रो॒ मदा॑य॒ प्रति॑ ध॒त्पिब॑ध्यै॒ शूरो॒ मदा॑य॒ प्रति॑ ध॒त्पिब॑ध्यै ॥ (५)
इस समय शूर इंद्र श्वेत, घड़े में भरे हुए, गाय के दूध से मिले हुए, तृप्तिकारक सार से युक्त एवं अध्वर्युगण द्वारा दिए अन्न तथा मधुर सोम का पान करें. (५)
At this time, the brave Indra, filled in a white pitcher, mixed with cow's milk, containing the satiating essence and given by the Adhwaryugans, should drink sweet Soma. (5)