ऋग्वेद (मंडल 4)
नकि॑रिन्द्र॒ त्वदुत्त॑रो॒ न ज्याया॑ँ अस्ति वृत्रहन् । नकि॑रे॒वा यथा॒ त्वम् ॥ (१)
हे वृत्रहंता इंद्र! संसार में कोई भी तुम्हारी अपेक्षा उत्तम एवं प्रशंसनीय नहीं है. हे इंद्र! तुम्हारे समान कोई प्रसिद्ध नहीं है. (१)
O Vrithrahanta Indra! No one in the world is better and more praiseworthy than you. O Indra! There is no one as famous as you. (1)
ऋग्वेद (मंडल 4)
स॒त्रा ते॒ अनु॑ कृ॒ष्टयो॒ विश्वा॑ च॒क्रेव॑ वावृतुः । स॒त्रा म॒हाँ अ॑सि श्रु॒तः ॥ (२)
हे इंद्र! प्रजाएं तुम्हारे पीछे उसी प्रकार चलें, जिस प्रकार गाड़ी सभी जगह पहिए के पीछे जाती है. हे इंद्र! तुम वास्तव में महान् एवं प्रसिद्ध हो. (२)
O Indra! Let the people follow you in the same way as the car goes behind the wheel everywhere. O Indra! You are really great and famous. (2)
ऋग्वेद (मंडल 4)
विश्वे॑ च॒नेद॒ना त्वा॑ दे॒वास॑ इन्द्र युयुधुः । यदहा॒ नक्त॒माति॑रः ॥ (३)
हे इंद्र! असुरों को जीतने की इच्छा से देवों ने तुम्हारी सहायता से बल प्राप्त करके असुरों के साथ युद्ध किया. इसी हेतु तुमने रात-दिन शत्रुओं का नाश किया. (३)
O Indra! With the desire to conquer the asuras, the devas fought with the asuras by gaining strength with your help. That's why you have destroyed your enemies day and night. (3)
ऋग्वेद (मंडल 4)
यत्रो॒त बा॑धि॒तेभ्य॑श्च॒क्रं कुत्सा॑य॒ युध्य॑ते । मु॒षा॒य इ॑न्द्र॒ सूर्य॑म् ॥ (४)
हे इंद्र! उस संग्राम में तुमने युद्ध करने वाले कुत्स एवं उसके सहायकों के लिए सूर्य के रथ का पहिया चुराया था. (४)
O Indra! In that battle, you stole the wheel of the sun's chariot for the fighting dogs and his helpers. (4)
ऋग्वेद (मंडल 4)
यत्र॑ दे॒वाँ ऋ॑घाय॒तो विश्वा॒ँ अयु॑ध्य॒ एक॒ इत् । त्वमि॑न्द्र व॒नूँरह॑न् ॥ (५)
हे इंद्र! तुम अकेले ने देवों को बाधा पहुंचाने वाले सभी राक्षसों के साथ युद्ध किया एवं उन हिंसकों को मारा. (५)
O Indra! You alone fought with all the demons who hindered the gods and killed those violent ones. (5)
ऋग्वेद (मंडल 4)
यत्रो॒त मर्त्या॑य॒ कमरि॑णा इन्द्र॒ सूर्य॑म् । प्रावः॒ शची॑भि॒रेत॑शम् ॥ (६)
हे इंद्र! उस संग्राम में तुमने एतश ऋषि की रक्षा के लिए सूर्य की हिंसा की एवं एतश ऋषि को बचाया. (६)
O Indra! In that struggle, you committed violence against the sun to protect the sage Etash and saved the sage Etash. (6)
ऋग्वेद (मंडल 4)
किमादु॒तासि॑ वृत्रह॒न्मघ॑वन्मन्यु॒मत्त॑मः । अत्राह॒ दानु॒माति॑रः ॥ (७)
हे वृत्रनाशक एवं धनस्वामी इंद्र! उसके पश्चात् तुम क्रोधित हुए एवं दिन के समय आकाश में दनुपुत्र वृत्र का नाश किया. (७)
O the conqueror and the rich indra! After that you became angry and destroyed the danuputra Vrithra in the sky during the day. (7)
ऋग्वेद (मंडल 4)
ए॒तद्घेदु॒त वी॒र्य१॒॑मिन्द्र॑ च॒कर्थ॒ पौंस्य॑म् । स्त्रियं॒ यद्दु॑र्हणा॒युवं॒ वधी॑र्दुहि॒तरं॑ दि॒वः ॥ (८)
हे इंद्र! तुमने अपनी शक्ति को सामर्थ्यपूर्ण बनाया और स्वर्ग की पुत्री उस उषा का वध किया जो तुम्हें मारना चाहती थी. (८)
O Indra! You made your power powerful and killed usha, the daughter of heaven, who wanted to kill you. (8)