हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 4.30.7

मंडल 4 → सूक्त 30 → श्लोक 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 4)

ऋग्वेद: | सूक्त: 30
किमादु॒तासि॑ वृत्रह॒न्मघ॑वन्मन्यु॒मत्त॑मः । अत्राह॒ दानु॒माति॑रः ॥ (७)
हे वृत्रनाशक एवं धनस्वामी इंद्र! उसके पश्चात्‌ तुम क्रोधित हुए एवं दिन के समय आकाश में दनुपुत्र वृत्र का नाश किया. (७)
O the conqueror and the rich indra! After that you became angry and destroyed the danuputra Vrithra in the sky during the day. (7)