हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 4.31.13

मंडल 4 → सूक्त 31 → श्लोक 13 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 4)

ऋग्वेद: | सूक्त: 31
अ॒स्मभ्यं॒ ताँ अपा॑ वृधि व्र॒जाँ अस्ते॑व॒ गोम॑तः । नवा॑भिरिन्द्रो॒तिभिः॑ ॥ (१३)
हे इंद्र! तुम रक्षा के नवीन उपायों द्वारा शूर के समान हमारे लिए उन गोशालाओं के द्वार खोलो, जिनमें गाएं रहती हों. (१३)
O Indra! You, as a knight, by innovative means of protection, open to us the gates of the goshalas in which cows live. (13)