हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 4.31.14

मंडल 4 → सूक्त 31 → श्लोक 14 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 4)

ऋग्वेद: | सूक्त: 31
अ॒स्माकं॑ धृष्णु॒या रथो॑ द्यु॒माँ इ॒न्द्रान॑पच्युतः । ग॒व्युर॑श्व॒युरी॑यते ॥ (१४)
हे इंद्र! हमारा शत्रुविनाशकारी, दीप्तिशाली, विनाशरहित, बैलों और घोड़ों से युक्त रथ सभी जगह जावे. उस रथ के साथ-साथ हमारी भी रक्षा करो. (१४)
O Indra! Let our enemy go everywhere, destructive, glorious, destruction-free, chariots full of bulls and horses. Along with that chariot, protect us as well. (14)