हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 4.32.12

मंडल 4 → सूक्त 32 → श्लोक 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 4)

ऋग्वेद: | सूक्त: 32
अवी॑वृधन्त॒ गोत॑मा॒ इन्द्र॒ त्वे स्तोम॑वाहसः । ऐषु॑ धा वी॒रव॒द्यशः॑ ॥ (१२)
हे इंद्र! स्तोत्रों को वहन करने वाले गौतमवंशीय ऋषियों ने तुम्हें अपनी स्तुतियों द्वारा बढ़ाया है. तुम इन्हें पुत्र-पौत्र वाला अन्न दो. (१२)
O Indra! The Gautama dynastic sages carrying the hymns have exhorted you by their praises. Give them son-grandson's food. (12)